कभी-कभी रिश्ता टूटता नहीं है,
बस बातें करना कम हो जाता है…
मन की बातें दिल में ही रह जाती हैं,
और सामने वाला समझ नहीं पाता।
शिकायतें होती हैं, पर आवाज़ नहीं होती।
दूरी बढ़ती है, पर वजह समझ नहीं आती।
कभी सिर्फ एक कॉल या एक “तुम ठीक हो?”
सुनना काफी होता है,
पर जब वो भी ना मिले — तो दिल थक जाता है।
रिश्ते में प्यार की ज़रूरत होती है,
पर उससे ज़्यादा ज़रूरत होती है समझने और सुनने वाले की।
💡 “रिश्ते निभाना मुश्किल नहीं होता, बस आजकल लोगों के पास वक़्त और सच्ची परवाह की कमी होती है…”
नमस्ते! मैं ज्योति झा हूँ, RelationshipBlog.in की संस्थापिका। मनोविज्ञान (Psychology) और मानवीय व्यवहार (Human Behavior) में गहरी रुचि के साथ, मेरा मिशन हिंदी पाठकों को उन भावनात्मक उलझनों से बाहर निकालना है जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। मैं अपने लेखों के माध्यम से Emotional Healing, आत्म-सम्मान (Self-Respect) और रिश्तों में सुधार के लिए रिसर्च-आधारित और सहानुभूतिपूर्ण मार्गदर्शन साझा करती हूँ।
