मैं थक गई हूँ… पर रुकना नहीं चाहती: एक औरत की मुस्कुराती जंग
“मैं थक गई हूँ… पर रुकना नहीं चाहती” हर सुबह सूरज की किरणों के साथ एक नई उम्मीद जागती है… लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जिनके लिए हर सुबह एक जंग की तरह होती है। यह कहानी है एक औरत की — जो बाहर से मुस्कुराती है, पर अंदर से रोज़ खुद को … मैं थक गई हूँ… पर रुकना नहीं चाहती: एक औरत की मुस्कुराती जंग को पढ़ना जारी रखें
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