“कभी-कभी हम मुस्कुराते हैं… सिर्फ ये दिखाने के लिए कि हम टूटे नहीं हैं” मेरे लिए “रोमांस” की परिभाषा… जब कोई अपना होकर भी अपना नहीं लगता… “मां बन जाना …
बिना सहारे कैसे मजबूत बनें?
जब कोई अपना होकर भी अपना नहीं लगता… “अगर कोई साथ नहीं है, तो क्या मैं टूट जाऊँ? “अगर कोई मेरा हाथ नहीं थाम रहा, तो क्या मैं चल नहीं …